ज़िन्दगी भर तुझे हम मनाते रहे.
ज़िन्दगी भर तुझे हम मनाते रहे.
मुस्कुराते रहे, दिल लुभाते रहे,
बात कुछ और थी, तुम छुपाते रहे.
दर्द जैसे मुसलसल ग़ज़ल हो कोई,
लोग सदियों इसे गुनगुनाते रहे.
इस कदर मुफलिसी का चढ़ा है जुनूं,
अपने एहसास भी हम लुटाते रहे.
एक शोखी नयी, इक नया सा सुकूं.
इस भरम में ही पीते पिलाते रहे.
ख़ैर दुनियाँ तो हमने भी देखी नहीं,
हाँ मगर एक दुनियाँ बनाते रहे.
ज़िन्दगी रूठ जाने की हद हो गई,
ज़िन्दगी भर तुझे हम मनाते रहे.
तुम चले भी गए , और गए भी नहीं,
'होंठ-में-स्वाद' से , याद आते रहे.
आज जाकर मुकम्मिल हुई इक ग़ज़ल,
आज अपना ही लिक्खा मिटाते रहे.
त्रिवेणी
कुछ छुपा था कहीं, हम दिखाते रहे.
एक रिश्ता पुराना हुआ फेंक दूं.