शनिवार, 28 नवंबर 2009

क्षणिका

"अरे बाबा ! कह तो रही हूँ ना,
नहीं जाऊँगी  तुम्हें छोड़ के कभी!!"
...जाऊं, अब?

31 टिप्‍पणियां:

  1. ह्म्म,
    अभी आया नही हूँ.

    ..जाऊं, अब?
    ;-)

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  2. अच्छा इसे त्रिवेणी कहते है ? मालूम नहीं था दर्पण जी,:) दो लेने मारी मगर जबरदस्त !

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  3. हा हा हा .... क्या बात है दर्पण मियाँ लूट लिया अमा यार तुमने आज मेरा दिल भी ... क्या खूब त्रिवेरी कही है .... गौतम जी का उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ चोरी कर लिया गया है इस कमाल की त्रिवेणी के लिए ... इस त्रिवेणी को संभाल के रखना दोस्त....


    अर्श

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  4. क्या बात है... दिल ले गए..

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  5. गजब की त्रिवेणी। कुशभाई नही कहते तो हम जरुर कह देते।

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  6. तो अब ये हालात ही गए हैं कि....

    मुझे भी अपने दोस्त की ही याद आई. बढ़िया.

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  7. KYA KAHNE DARPAN JI .....

    MAIN DO MINAT MEIN AAYE .... TUM PANCH PANCH MINUT MEIN KADCHI CHALAATE RAHNA SABJI MEIN ...

    KAHAAN HO AAJ KAR ..... APNI BLOG LIST SE HAMARA NAAM NIKAAL DIYA ... ABHI BLOG PAR NAHI AATE HO .. BHAI KOI NARAZGI HAI KYA ....

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  8. वाह भाई..ये रोजमर्रा के रोमांस से क्या जमीनी बात उकेर दी और वो भी त्रिवेणी की सुन्दर लय में..बेहतरीन,उम्दा..बेहतरीन..कुछ और लिखना चाहता हूँ..कुछ अनबोला सा..समझ ही लो बस..भाई..

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  9. देखता रह जाता हूँ, कविताओं के कितने संस्कार यहाँ दिखा देते हैं ।

    बेहतर !

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  10. आते ही जाने की भी ज़िद?
    पल दो पल का आना कैसा?
    जाण्ण ई ते जा असींवी चले ।आशीर्वाद लाजवाब त्रिवेणी

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  11. abhi aaye abhi baithe abhi daman sambhala hai
    teri jaun juan ne hamara dum nikala hai

    is triveni ne to kuch aisa hi kah diya na.

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  12. ओये होए ....!!

    उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़.......!!

    हम्म्म्मम्म्म्म.............!!

    जाऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँ अब .........????

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  13. इसे कहते है लेखन, लिखा तीन लाईन और टिप्‍पणी पाई बीस ठो, हम लोग तो बेकार का लेख लिखते है, दो दो पन्‍ना लिख डालते है और एक भी टिप्‍पणी नही मिलती :)


    भाई ई बतओ, बाबा को छोरी कहां मिली ?

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  14. रोज़मर्रा की मामूली सुन्दरता... सिम्पली द बेस्ट!!! "अभी ना जाओ छोड़ कर की दिल अभी भरा नहीं... "

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  15. प्रिय दर्शन .....कही कुछ गड़बड़ है .....एडिट की जरुरत है ......गौर से देखो....

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  16. nice..
    do check out

    www.simplypoet.com

    World's first multi lingual poetry portal

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  17. "3 rupiya pada hai tumhare mobile main,
    4 rupiye kuch paise mere mobile main bhi hain."
    saason ko judte hi umr lambi ho gayi hamari"

    भई ....दर्पण ....
    सारे शब्द आँखों से होते हुए
    सीधे दिल के आँगन में उतर गए हैं
    बता ये हुनर तूने सीखा कहाँ से.....!!!
    एक एक लफ्ज़ कह रहा है कि
    "aura" हर तरफ से "गुलज़ार" हो रहा है

    लाओ .....
    हाथ दो ....
    चूम लूं इसे .....
    ताकि जिस्म में जान आ जाए ज़रा

    ढेरों आशीर्वाद के साथ
    'मुफ़लिस'
    ----------------------------

    "अरे बाबा ! कह तो रही हूँ ना,
    नहीं जाऊँगी तुम्हें छोड़ के कभी!!"
    ....जाऊं अब.......??

    त्रिवेणी की वेणी में ऐसी अनोखी मनमोहक बेल... !!
    फूल नज़र ना आने पर भी
    चारों और सुगंध बिखरी महसूस की जा रही है
    वाह ! वाह !! वाह !!!
    लाजवाब . . . . . .
    with love . . .
    'muflis'

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  18. "अरे बाबा ! कह तो रही हूँ ना,
    नहीं जाऊँगी तुम्हें छोड़ के कभी!!
    ...जाऊं, अब?"

    और फिर जवाब सुनने के लिये भी नही रुकी...जिंदगी!
    ;-)

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  19. दर्पण,
    त्रिवेणी को पढ़ तो लिया है...
    पर इस का असर मत पूछ......

    यहाँ नहीं कहा जाएगा...

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  20. इतने कम में इतना ज्यादा ...
    इस त्रिवेणी में तो आपने व्यावहारिक - जगत
    की पूरी सच्चाई कह डाली ...
    जाने कितनी प्रेम(?) - कहानियों
    का दर्द आ गया --- सीमित और व्यापक ,
    दोनों रूपों में ...
    ............. गजब ................
    शुक्रिया ,,,,,,,,,,,,

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  21. यहाँ से गुजरता हुआ और पीछे जा रहा हूँ...

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  22. likha to he..
    baat bhi acchi lagi..
    par ismein sacchai nahi he||

    @darpan : tumhare lekhan ke liye ye koi nahi kah sakta ||
    aur jo madhurta aur gahraai sach me he wo aur kaha||

    haan par its too practical|| :)

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'ज़िन्दगी' भी कितनी लम्बी होती है ना??
'ज़िन्दगी' भर चलती है...

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