बुधवार, 3 मार्च 2010

आम होने के प्रति...

मैं एक आम आदमी हूँ,
बहुत ज़्यादा आम.

मन जब भी होता है,
ए-४ शीट में...
दुनियाँ के सभी दर्द उकेरने का,
तुम्हारे और मेरे आंसू...
कागज़ गुलाबी बना देते हैं.
मैं एक आम कवि हूँ.

उस लगभग ढहती हुई दिवार से सटाकर...
जब अंगीकार करता हूँ तुम्हें ,
तुम्हारी पीठ से छुप जाती हैं...
हँसिया और हथौड़ा,
मैं एक आम कॉमरेड हूँ.


जब तुम्हें देखता हूँ...
निर्वाणा की शर्ट पहने,
फ्लूरोसेंट ओउम भी दिखता है...
तुम्हारे उभारों में.
मैं एक आम योगी हूँ.

सुहागरात याद आती है...
जब कभी,
क्वांटम थ्योरी की...
एक में से केवल एक ही बिल्ली मरती है,
मैं एक आम वैज्ञानिक हूँ.

जब किसी वैश्या, भिखारी...
या सडती हुई लाश का...
करुण-क्रंदन सुनता हूँ,
तो छुपा लेता हूँ अपने आप को...
तुम्हारे ज़ानों के बीच.
मैं एक आम समाजवादी हूँ.

पीड़ा और आनंद...
दोनों,
तुम्हें पाकर,
एक साथ मिलते हैं यहाँ !
ठीक इसी जगह !!
ब्रेक इवेन पॉइंट !!!
मेरा अर्थशाश्त्र आम है.





युद्ध में,
किसी कलिंग सा हुआ जाता हूँ मैं,
मैं एक आम योद्धा हूँ.
/प्रेम में,
किंचित-वासनामय.
मैं एक आम प्रेमी हूँ.
...और इस तरह,
युद्ध और प्रेम में झूलता,
मेरा इतिहास आम है.




देखो...
कितना आम सा दर्शन है मेरा.
है ना?

...अरे, सच !!
मैं तो,
एक आम आदमी हूँ,
बहुत ज़्यादा आम.

और ये...
'बहुत ज़्यादा' आम होना
'कुछ हद तक' ख़ास बनत है मुझे,
कम से कम...
...तुम्हारी नज़रों में.

40 टिप्‍पणियां:

  1. भाई A-४ साइज़ पर छोटे लोग नहीं लिखते... :) हमेशा की तरह बेहतरीन कविता...
    जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

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  2. इसे बेहतरीन कहना एक अधूरापन होगा

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  3. मैं इनमेसे कौन सा आम हूँ ये तो नहीं पता मगर आम तो मैं भी हूँ...
    हो सकता है किसी ने बताया नहीं मगर अर्थशाश्त्र मुझे भी लोग कहते हैं...

    बिलकुल नयी किस्म की रचना पहली दफा पढ़ रहा हूँ...

    अर्श

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  4. एकदम clear vision... बेहतरीन ... मुझे यकीन है ... आज इससे अच्छी कविता नहीं मिलेगी... यह है 'असली' कविता ... कल ऐसी ही एक कविता गिरिजेश राव जी के ब्लॉग पर भी पढ़ा था जो खालिस हिंदी कविता थी... just ग्रेट

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  5. मैं तो फिर वही कहूँगा...उसने तुम्हे ठीक हीं कहा था 'चेन-स्मोकर'
    बाकी सब 'सागर' ने कह दिया है...

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  6. दर्द और आनंद,
    दोनों,
    तुम्हें पाकर एक साथ मिलते हैं,
    यहाँ !
    ठीक इसी जगह !!
    ब्रेक इवेन पॉइंट !!!
    मेरा अर्थशास्त्र आम है.

    इन लाइनों पे तो एक बार और कहा जा सकता है- चेन स्मोकर,
    'जस्ट किडिंग'

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  7. har baar apki rachana padaker sochati hoon
    ab aage kya? or aap har baar aage nikal jate hain.
    kai baar tippdi ke liye bahut se sabdon ki bali chadti hai fir bhi tippdi poori nahi ho pati.
    shukriya,ek or behtareen rachana ke liye.

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  8. आज के युग में अगर कोई आम आदमी भी बन सके तो ये बहुत ख़ास है ..... कितना कमाल का लिखते हो यार ... कुर्बान हूँ ऐसे आम आदमी पर .......

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  9. aaj wakai aam aadmi ko ukera hai aur ek sabse alag andaaz mein........gazab ki prastuti.

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  10. कमाल का हर लफ्ज़ है सुन्दर बेहतरीन

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  11. .
    .
    .
    प्रिय दर्पण,

    गजब का लिखते हो यार...

    एक 'आम' शख्स की लिखी ये पाती...
    'खास' बनाती है उसे...
    प्रेयसी की नजरों मे!

    और...
    मुझ जैसे पाठक की नजरों मे भी!

    उत्तर देंहटाएं
  12. मन जब भी होता है,
    ए-४ शीट में...
    दुनियाँ के सभी दर्द उकेरने का,
    तुम्हारे और मेरे आंसू...
    कागज़ गुलाबी बना देते हैं.
    मैं एक आम कवि हूँ.
    और ये...
    'बहुत ज़्यादा' आम होना
    'कुछ हद तक' ख़ास बनत है मुझे,
    कम से कम...
    ...तुम्हारी नज़रों में.

    बहुत" आम "(ख़ास ) है ये ....ज़रा सा हटके वाला दर्शन ...

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  13. पवन के पंखों पर बैठ कर चलती है आपकी चेतना और रचती है स्फुलिंग ।
    वैसे कई बार पढ़कर दर्शन को रोमावलि आर्द्र हो उठती है मेरी ।

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  14. Itna khaas aur umda 'aam' aaj tak nahee chakha. Badhayee ho Darshan jee.

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  15. एक आम आदमी हूँ,
    बहुत ज़्यादा आम.

    और ये...
    'बहुत ज़्यादा' आम होना
    'कुछ हद तक' ख़ास बनत है मुझे,





    लिखने का अंदाज़ कुछ हटकर है.

    भाव से भरा है.

    लिखते रहे !

    धन्यवाद !

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  16. तुम आम हो0??????????????????????????? कौन कहता है????????????????? आशीर्वाद्

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  17. और मै एक आम रीडर हू.. एक आम रीडर.. बेहतरीन...बहुत अपनी सी..

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  18. me ek aam pathak aour tippani karne ka pryaas bhi kartaa hu kintu vishesh har hamesh yahi lagaa ki me darpan ko padhh rahaa hu...aap AAM nahi lagte..kamsekam esi rachnaye pesh karke../

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  19. पिछली पोस्ट अभी तक पढने का वक़्त नहीं मिला है...



    और ये...
    'बहुत ज़्यादा' आम होना
    'कुछ हद तक' ख़ास बनत है मुझे,
    कम से कम...
    ...तुम्हारी नज़रों में.


    यहाँ पर आकर कुछ अटक सा गया है अन्दर...
    मालूम नहीं क्या चल रहा है..

    गुस्सा आ रहा है...या जाने क्या...

    i love you jhon.....!!!!!

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  20. ज़िन्दगी भी कितनी लम्बी होती है न jhon.....?
    उम्र भर चलती है...

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  21. आज खूब सारी फुरसतें निकाल कर आया हूँ प्राची के इस पार। वैसे ब्लौग का नया कलेवर अभी निर्माणाधीन लग रहा है कि अब तलक इसका नाम भी नहीं लग पाया है और साइड-बार पर देखता हूँ कि उम्र की बंदिशें भी हटा ली गयी हैं। अचानक से खुद को तुम्हारा हम-उम्र ही समझने लगा हूँ.. :-)

    आज की कविता पर आते हुये...तो ये तुम्हारी गज़ब की लेखनी है जो इस एकदम आम-सी कविता को भी खास बना देती है। तुम्हारी ऊँचाईयाँ नित नये आयाम लेकर आती हैं। जैसा कि सागर ने कहा है ऊपर...किंतु उससे किंचित दो कदम आगे जाते हुए...अभी विगत कुछ दिनों में पढ़ी गयी सर्व्श्रेष्ठ कविता। यकीन मानो इसमें कुछ नामी कवियों की कवितायें भी शामिल हैं।

    गज़ब के बिम्ब हैं सारे के सारे...चाहे वो मंत्रा टी-शर्ट के बहाने योगी का इमेज हो या फिर विज्ञानशाला में एक्सपेरिमेंट के नाम पर जानवरों पर प्रयोग करता हुआ आम वैज्ञानिक की तस्वीर...समाजवादी की तस्वीर तनिक और स्पष्ट खींची जा सकती थी।

    एक बहुत ही खासम खास कविता! बधाई स्वीकारो हमारी, अपनी इस लेखनी की महत्ता को लगातार बरकरार रखने के लिये।

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  22. मुझे इसके कई टुकड़े बेहतरीन लगे .जैसे ये ........
    पीड़ा और आनंद...
    दोनों,
    तुम्हें पाकर,
    एक साथ मिलते हैं यहाँ !
    ठीक इसी जगह !!
    ब्रेक इवेन पॉइंट !!!
    मेरा अर्थशाश्त्र आम है.

    ओर कई क्लासिक ...जैसे ये ......अलबत्ता क्लासिक का नजरिया सबका अपना जुदा जुदा है ......

    युद्ध में,किसी कलिंग सा हुआ जाता हूँ मैं,
    मैं एक आम योद्धा हूँ.
    /प्रेम में,
    किंचित-वासनामय.
    मैं एक आम प्रेमी हूँ.
    ...और इस तरह,
    युद्ध और प्रेम में झूलता,
    मेरा इतिहास आम है.

    ओर यहाँ बस सच्चे ......खालिस ......

    जब तुम्हें देखता हूँ...
    निर्वाणा की शर्ट पहने,
    फ्लूरोसेंट ओउम भी दिखता है...
    तुम्हारे उभारों में.
    मैं एक आम योगी हूँ.
    अलबत्ता योगी की जगह कुछ ओर बिठाने की इच्छा हुई.....पर शायद तुम्हारे दिमाग के भीतर कुछ ओर चल रहा हो इसे लिहते वक़्त,,,,,,

    कुल मिलाकर जोड़ .....again superb....

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  23. और ये...
    'बहुत ज़्यादा' आम होना
    'कुछ हद तक' ख़ास बनाता है मुझे,
    कम से कम...
    ...तुम्हारी नज़रों में.

    ...वाह! बहुत अच्छी कविता.

    आपको देखा
    आपसे बात करने की इच्छा हुई
    मगर
    पर्याप्त नहीं था शायद
    एक लोकार्पण समारोह या दिल्ली का पुस्तक मेला.

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  24. पीड़ा और आनंद...
    दोनों,
    तुम्हें पाकर,
    एक साथ मिलते हैं यहाँ !



    युद्ध में,
    किसी कलिंग सा हुआ जाता हूँ मैं,
    मैं एक आम योद्धा हूँ.
    /प्रेम में,
    किंचित-वासनामय.
    मैं एक आम प्रेमी हूँ.
    ...और इस तरह,
    युद्ध और प्रेम में झूलता,
    मेरा इतिहास आम है.


    bahut sachche khyalaat

    bahut khoobsurat dhang se baat kahi hai ...... aam hona bhi mujhe khas banata hai ..... tumhari nazron mein

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  25. a ४ शीट का ये फायदा है आंसू या दर्द के लिए space ज्यादा कम की कोई प्रॉब्लम नहीं.जितना चाहे space लो.

    break even point जहा नफा न नुक्सान,बस आम इंसान.

    quantum theory.??
    h=this.
    this is = to this.
    all value of q between the classical turning points.
    इतिहास,अर्थशाश्त्र,
    समाजवाद तो ठीक है पर physics??
    उफ़ तौबा तौबा .

    joke अपार्ट.. हर आम आदमी किसी न किसी के लिए खास जरूर होता है.

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  26. सच में बन्धु! अपने पास एक A4 शीट ही है।

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  27. शब्दों की प्रस्तुति काबिले तारीफ हैं |

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  28. इसे आम कहेंगे न..तो आम ही रहे आम, और कुछ भी कहना समंदर में बूँदें धर देना होगा.

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  29. ऐसे ही एक आम आदमी को ये आम आदमी भी जानता था ....
    उस आम आदमी का नाम है ... दर्पण साहा ....

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  30. दोबारा पढ़ा .....ओर लगा पहले कितना कुछ था जो जाना नहीं था .......

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'ज़िन्दगी' भी कितनी लम्बी होती है ना??
'ज़िन्दगी' भर चलती है...

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