शनिवार, 5 जुलाई 2014

वास्तिवकता करो

कल्पना करो कि तुम नौकरी करते हो
कल्पना करो कि तुम खाते पीते हो
कल्पना करो शादी करते हो
कल्पना करो तुम्हारे बच्चे हैं
मान लो कि तुम्हारा एक परिवार है
मान लो कि हर महीने मकान की ई. एम. आई. भरते हो
और हर वर्ष आई. टी. रिटर्न
समझो ऐसा कि तुम अपनी प्रेमिका को चूमते हो
और बाहों में भरते हो
मई के महीने में तुम पसीने पसीने हो जाते हो
और सोचो कि दिसम्बर में ठिठुरन होती है
कैसा हो कि अमेरिका जैसा कोई राष्ट्र
रशिया से पहले चाँद में पहुंच जाए
और सोचो कोई ऐसा यंत्र जिससे मीलों दूर रहकर भी सुन सको एक दूसरे की आवाज़
किसी सिद्धार्थ का बुद्ध होना सोचो
और सोचो कि एक दिन हम मर जाएंगे
कभी सोचो कि तुम बहुत प्रेम करते हो
और अलगे पल अपने अवसाद सोचो
सोचो कि तुम 'हो'
यकीन करोगे तो सब सच लगने लगेगा तुम्हें एक दिन
कल्पना करो जो नहीं है
कल्पना करो बस वही तो है
बस इसलिए ही तो है।

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'ज़िन्दगी' भी कितनी लम्बी होती है ना??
'ज़िन्दगी' भर चलती है...

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