आम होने के प्रति...
मैं एक आम आदमी हूँ,
बहुत ज़्यादा आम.
मन जब भी होता है,
ए-४ शीट में...
दुनियाँ के सभी दर्द उकेरने का,
तुम्हारे और मेरे आंसू...
कागज़ गुलाबी बना देते हैं.
मैं एक आम कवि हूँ.
उस लगभग ढहती हुई दिवार से सटाकर...
जब अंगीकार करता हूँ तुम्हें ,
तुम्हारी पीठ से छुप जाती हैं...
हँसिया और हथौड़ा,
मैं एक आम कॉमरेड हूँ.
जब तुम्हें देखता हूँ...
निर्वाणा की शर्ट पहने,
फ्लूरोसेंट ओउम भी दिखता है...
तुम्हारे उभारों में.
मैं एक आम योगी हूँ.
सुहागरात याद आती है...
जब कभी,
क्वांटम थ्योरी की...
एक में से केवल एक ही बिल्ली मरती है,
मैं एक आम वैज्ञानिक हूँ.
जब किसी वैश्या, भिखारी...
या सडती हुई लाश का...
करुण-क्रंदन सुनता हूँ,
तो छुपा लेता हूँ अपने आप को...
तुम्हारे ज़ानों के बीच.
मैं एक आम समाजवादी हूँ.
मैं एक आम योद्धा हूँ.
/प्रेम में,
किंचित-वासनामय.
मैं एक आम प्रेमी हूँ.
...और इस तरह,
युद्ध और प्रेम में झूलता,
मेरा इतिहास आम है.
देखो...
कितना आम सा दर्शन है मेरा.
बहुत ज़्यादा आम.
मन जब भी होता है,
ए-४ शीट में...
दुनियाँ के सभी दर्द उकेरने का,
तुम्हारे और मेरे आंसू...
कागज़ गुलाबी बना देते हैं.
मैं एक आम कवि हूँ.
उस लगभग ढहती हुई दिवार से सटाकर...
जब अंगीकार करता हूँ तुम्हें ,
तुम्हारी पीठ से छुप जाती हैं...
हँसिया और हथौड़ा,
मैं एक आम कॉमरेड हूँ.
जब तुम्हें देखता हूँ...
निर्वाणा की शर्ट पहने,
फ्लूरोसेंट ओउम भी दिखता है...
तुम्हारे उभारों में.
मैं एक आम योगी हूँ.
सुहागरात याद आती है...
जब कभी,
क्वांटम थ्योरी की...
एक में से केवल एक ही बिल्ली मरती है,
मैं एक आम वैज्ञानिक हूँ.
जब किसी वैश्या, भिखारी...
या सडती हुई लाश का...
करुण-क्रंदन सुनता हूँ,
तो छुपा लेता हूँ अपने आप को...
तुम्हारे ज़ानों के बीच.
मैं एक आम समाजवादी हूँ.
पीड़ा और आनंद...
दोनों,
तुम्हें पाकर,
एक साथ मिलते हैं यहाँ !
ठीक इसी जगह !!
ब्रेक इवेन पॉइंट !!!
मेरा अर्थशाश्त्र आम है.
किसी कलिंग सा हुआ जाता हूँ मैं,मैं एक आम योद्धा हूँ.
/प्रेम में,
किंचित-वासनामय.
मैं एक आम प्रेमी हूँ.
...और इस तरह,
युद्ध और प्रेम में झूलता,
मेरा इतिहास आम है.
देखो...
कितना आम सा दर्शन है मेरा.