संदेश

नवंबर, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्षणिका

"अरे बाबा ! कह तो रही हूँ ना,
नहीं जाऊँगी  तुम्हें छोड़ के कभी!!"
...जाऊं, अब?