शनिवार, 16 नवंबर 2013

Donnie Darko को देखते हुए



सात और आठ के बीच भी हैं
कई और संख्याएँ.
अनंत दिशाएँ हैं,
प्राची और उत्तर के बीच.

नहीं और हाँ के बीच में 
ढेर सारी हिचकिचाहटें 
...और उनकी व्याख्याएँ

जीवन और मृत्यु के मध्य में है
वर्तमान

पीड़ा और आनंद के बीच पेंडुलम सा झूलता अस्तित्व
होने न होने के मध्य में स्मृतियाँ
स्वप्न और वास्तविकता के बीच
-तुम!

कितने ही तो अनकहे सम्वाद ठहरे
किन्हीं दो में से दोनों के.

वे कहते हैं, "आत्मा और शरीर के बीच मन जैसी कोई चीज़ होती है"
जैसे, होने न होने के बीच हमारी इच्छाएँ
इच्छाएँ, न केवल पाने भर की ही
कुछेक खो देने की भी !

क्या कविताएँ नहीं हैं मौन एवं शब्दों के कहीं मध्य में?
किसी न्यूट्रॉन सी तटस्थता सदा ही पसरी रही है
छूने और छोड़ देने के बीच

जैसे निश्चितताओं के दो छोरों के बीच
सम्भावनाएं
वैसे ही क्या भय और प्रेम के दो छोरों के बीच कुछ भी नहीं?

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'ज़िन्दगी' भी कितनी लम्बी होती है ना??
'ज़िन्दगी' भर चलती है...

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